मिज़ोरम के लुंगलेई ज़िले के 80 स्कूलों में पढ़ने वाले 5,500 से ज़्यादा छात्रों को अब AI की मुफ़्त पढ़ाई मिलेगी। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 6 नवंबर 2026 को ‘लुंगलेई Gen-AI मिशन’ शुरू किया, जिसके पहले चरण में 30 एक घंटे के मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। ज़िला शिक्षा कार्यालय और CodeYogi Foundation मिलकर इसे चला रहे हैं, और छात्रों से इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जाएगा।
छोटे ज़िले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र अक्सर नई तकनीक से सबसे आखिर में जुड़ते हैं। मिज़ोरम के लुंगलेई ज़िले में यह तस्वीर बदलने की कोशिश शुरू हुई है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 6 नवंबर 2026 को लुंगलेई के सरकारी हाई स्कूल में Gen-AI मिशन का शुभारंभ किया। इसका नाम रखा गया है — “लुंगलेई Gen-AI मिशन: लुंगलेई की Gen-Alpha, AI से सशक्त”।
पहले चरण में ज़िले के 80 स्कूलों के 5,500 से ज़्यादा छात्र इस मिशन से जुड़ेंगे। ज़िला प्रशासन की अगुआई में इसे ज़िला शिक्षा कार्यालय और CodeYogi Foundation मिलकर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मौके पर कहा कि AI अब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है, इसलिए छात्रों को इसे समझना और इसका सही इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि यह कार्यक्रम आगे दूसरे ज़िलों तक भी पहुंचेगा।
30 मुफ़्त मॉड्यूल में क्या सिखाया जाएगा
मिशन के पहले चरण के लिए CodeYogi Foundation ने 30 एक घंटे के मॉड्यूल तैयार किए हैं। इनमें AI की बुनियादी जानकारी, आज के AI प्लेटफ़ॉर्म और उनके रोज़मर्रा के कामों में इस्तेमाल को शामिल किया गया है। छात्र ये मॉड्यूल अपनी रफ़्तार से, शिक्षकों की मदद से पूरा करेंगे।
सबसे अहम बात यह है कि छात्रों को इन मॉड्यूल के लिए कुछ भी देना नहीं होगा। सरकारी स्कूलों के उन छात्रों के लिए यह बड़ी राहत है, जिनके पास महंगे कोर्स या प्राइवेट ट्यूशन का विकल्प नहीं होता। AI सीखने की शुरुआत किताबी परिभाषाओं से नहीं, बल्कि उन टूल्स से होगी जो छात्र अपने फोन पर ही चला सकते हैं।
फोन से पढ़ाई: CodeYogi का तरीका
CodeYogi Foundation का तरीका बाकी ऑनलाइन कोर्स से अलग है। इसकी पढ़ाई स्मार्टफोन पर चलती है। इसके लिए कंप्यूटर, लैब या अंग्रेज़ी की ज़रूरत नहीं पड़ती। फाउंडेशन की शुरुआत IIT दिल्ली के पूर्व छात्र प्रशांत चौधरी ने की थी, और यह अब भारतीय भाषाओं में कोडिंग और AI सिखाने का काम करती है।
पिछले तीन साल में CodeYogi 9 राज्यों के 120 ज़िलों में 3.5 लाख से ज़्यादा छात्रों तक पहुंच चुकी है। अप्रैल 2026 में इसने WhatsApp पर 30 दिन का AI Fluency Programme शुरू किया था, जिसमें दो महीने के भीतर 68,000 से ज़्यादा छात्र और 3,000 शिक्षक जुड़ गए थे। 31 अक्टूबर 2026 को प्रशांत चौधरी को ग्रामीण विकास में योगदान के लिए पांचवां रोहिणी नय्यर पुरस्कार भी मिला, जिसमें 10 लाख रुपये की राशि है।

बाकी भारत के छात्रों के लिए इसका मतलब क्या है
मिज़ोरम का यह मिशन अकेला कदम नहीं है। देशभर में राज्यों और कंपनियों के बीच AI पढ़ाई को स्कूलों तक पहुंचाने की होड़ लगी है। तेलंगाना में 1 लाख छात्रों को मुफ़्त AI और क्लाउड ट्रेनिंग देने की योजना चल रही है, और OpenAI का लर्निंग एक्सेलेरेटर भारत में 5 लाख ChatGPT लाइसेंस दे रहा है।
मिज़ोरम वाला मिशन इनसे एक बात में अलग है: यह किसी बड़े शहर या कॉलेज से शुरू नहीं हुआ, बल्कि एक दूर के ज़िले के स्कूलों से हुआ है। जिन छात्रों के पास लैपटॉप या कंप्यूटर लैब नहीं है, उनके लिए फोन पर चलने वाले 30 घंटे के मुफ़्त मॉड्यूल ही असली शुरुआत हैं। अगर यह मॉडल लुंगलेई में काम कर गया, तो दूसरे ज़िलों और राज्यों के लिए भी रास्ता खुल जाएगा।
इस बीच Google की Guided Learning भी Classroom में आ चुकी है, जो छात्रों को सीधा जवाब देने की जगह सवाल पूछकर पढ़ाती है। मिज़ोरम के मॉड्यूल और ऐसे टूल्स का मकसद एक ही है — छात्र AI से उत्तर कॉपी न करे, बल्कि उसे समझकर इस्तेमाल करना सीखे।

छात्रों को अभी क्या करना चाहिए
लुंगलेई के 80 स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को अपने शिक्षकों से पूछना चाहिए कि उनके स्कूल में मॉड्यूल कब से शुरू हो रहे हैं। बाकी राज्यों के छात्र भी इंतज़ार न करें — CodeYogi Foundation की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके WhatsApp वाले AI Fluency Programme की जानकारी मिलती है, जो फोन पर ही चलता है।
एक बात साफ़ है: AI अब सिर्फ बड़े शहरों के कॉलेजों या महंगे कोर्स का विषय नहीं रहा। मिज़ोरम का यह मिशन दिखाता है कि सही तरीके से पढ़ाया जाए तो एक छोटा ज़िला भी 5,500 छात्रों को एक साथ AI की बुनियादी समझ दे सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लुंगलेई Gen-AI मिशन क्या है? यह मिज़ोरम के लुंगलेई ज़िले में 6 नवंबर 2026 को शुरू हुआ कार्यक्रम है, जिसमें 80 स्कूलों के 5,500 से ज़्यादा छात्रों को AI की बुनियादी जानकारी और आज के AI टूल्स का इस्तेमाल सिखाया जाएगा।
क्या इस मिशन के मॉड्यूल मुफ़्त हैं? हां। पहले चरण के 30 एक घंटे के मॉड्यूल छात्रों को मुफ़्त दिए जा रहे हैं। छात्र इन्हें अपनी रफ़्तार से, शिक्षकों की मदद से पूरा करेंगे।
CodeYogi Foundation कौन है? यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसकी शुरुआत IIT दिल्ली के पूर्व छात्र प्रशांत चौधरी ने की थी। यह स्मार्टफोन पर, भारतीय भाषाओं में कोडिंग और AI सिखाती है और पिछले तीन साल में 9 राज्यों के 120 ज़िलों में 3.5 लाख से ज़्यादा छात्रों तक पहुंच चुकी है।
क्या यह मिशन सिर्फ मिज़ोरम के छात्रों के लिए है? अभी यह लुंगलेई ज़िले के 80 स्कूलों तक सीमित है, पर मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि इसे दूसरे ज़िलों में भी बढ़ाया जाएगा।
