NCERT ने Class 9 से 12 के छात्रों के लिए AI का 20 घंटे का नया मॉड्यूल जारी कर दिया है। इसमें रटने वाली थ्योरी नहीं, बल्कि गतिविधियों से सीखना है: मशीन कैसे सीखती है, Deepfake कैसे पहचाना जाए और AI को अपनी निजी जानकारी क्यों नहीं देनी चाहिए। मॉड्यूल उन छात्रों के लिए भी बना है जिन्होंने AI के बारे में पहले कभी नहीं पढ़ा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने Class 9 से 12 के छात्रों के लिए Computational Thinking और Artificial Intelligence का एक नया शुरुआती मॉड्यूल जारी किया है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और इसे IIT मद्रास, IIT जोधपुर और NCERT के शिक्षकों ने मिलकर तैयार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक मॉड्यूल 23 अक्टूबर को जारी हुआ।

खास बात यह है कि इसके लिए AI की कोई पुरानी जानकारी ज़रूरी नहीं। ज़ोर इस पर है कि छात्र AI को समझें, उस पर सवाल उठाएं और उसका इस्तेमाल सोच-समझकर करें।

20 घंटे, 5 यूनिट: क्या-क्या सिखाया जाएगा

पूरा मॉड्यूल 20 घंटे का है और पांच यूनिट में बंटा है। हर यूनिट में चर्चा, प्रयोग और चिंतन है, और गतिविधियां उपकरणों के साथ भी हो सकती हैं और उनके बिना भी।

  • रोज़मर्रा की AI: शब्द सुझाने वाला कीबोर्ड और गाने सुझाने वाले ऐप जैसे उदाहरणों से पैटर्न पहचानना, जैसे भीड़ में दोस्त को पहचानना।
  • मशीनें कैसे सीखती हैं: छात्र खुद एक इमेज क्लासिफायर को प्रशिक्षित करेंगे, फिर उसकी कमज़ोरियां परखेंगे, ताकि समझ आए कि ट्रेनिंग डेटा नतीजों को कैसे बदलता है।
  • जब AI गलत हो जाए: गलत जानकारी, Deepfake और AI के भ्रम (hallucination) पर काम होगा, साथ ही जानकारी जांचने का पांच चरणों वाला तरीका भी सिखाया जाएगा।
  • डेटा प्राइवेसी: निजी डेटा, सहमति, निष्पक्षता और डिजिटल सुरक्षा, साथ ही भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 से परिचय।
  • AI सहायक है: अच्छे प्रॉम्प्ट लिखना, AI के जवाब जांचना और गलतियां पकड़ना। छात्र एक “Curious Notebook” भी रखेंगे, जिसमें अपने अवलोकन दर्ज करेंगे।

मशीनें कैसे सीखती हैं, और कब गलत हो जाती हैं

दूसरी और तीसरी यूनिट इस मॉड्यूल का दिल मानी जा सकती हैं। मशीन लर्निंग को किताबी परिभाषा से नहीं, बल्कि करके समझाया जाएगा। जब छात्र खुद क्लासिफायर बनाएंगे और उसे गलत करते देखेंगे, तो उन्हें यह बात अपने आप समझ आएगी कि AI अचूक नहीं होता। उसका जवाब उतना ही अच्छा होता है जितना अच्छा उसका डेटा होता है।

गलत जानकारी वाली यूनिट की आदत सोशल मीडिया पर हर दिन काम आएगी, जहां Deepfake वीडियो और AI से बनी तस्वीरें तेज़ी से फैलती हैं।

कंप्यूटर लैब में कंप्यूटर पर काम करते छात्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)

निजी जानकारी और Deepfake से बचाव

चौथी यूनिट छात्रों को एक साफ चेतावनी भी देती है: AI टूल्स को अपनी संवेदनशील जानकारी मत दो। रिपोर्टों के मुताबिक मॉड्यूल में आधार और पैन नंबर, पासवर्ड, वन-टाइम पासवर्ड और निजी दस्तावेज़ साझा न करने की बात खास तौर पर कही गई है। छात्र उन ऐप्स की प्राइवेसी नीतियां भी परखेंगे जिन्हें वे खुद इस्तेमाल करते हैं: कौन-सा डेटा लिया जा रहा है और वह कितने समय तक रखा जाएगा।

यह हिस्सा मुफ़्त AI टूल्स इस्तेमाल करने वाले छात्रों के लिए खास तौर पर काम का है, क्योंकि मुफ़्त टूल में अकसर यह पता नहीं चलता कि डेटा कहां जा रहा है।

बिना कंप्यूटर भी पढ़ाई संभव

मॉड्यूल का लचीलापन इसकी एक बड़ी ख़ूबी है। स्कूलों के पास तीन तरीके होंगे: छात्र अपने या साझा उपकरणों पर काम कर सकते हैं, शिक्षक एक साझा स्क्रीन पर प्रदर्शन कर सकते हैं, या फिर कागज़ और कक्षा-चर्चा से काम चल सकता है। तीसरा तरीका “अनप्लग्ड” सीखना कहलाता है, जो उन स्कूलों के लिए है जहां कंप्यूटर या इंटरनेट की सुविधा सीमित है।

इसका मतलब यह है कि AI की बुनियादी समझ के लिए महंगा उपकरण ज़रूरी नहीं। चर्चा, प्रयोग और चिंतन से भी वही अवधारणाएं सीखी जा सकती हैं। यही वजह है कि NCERT ने इसे रटने वाला मॉड्यूल नहीं, बल्कि अभ्यास की आदतों का सेट कहा है।

कक्षा में बैठकर गतिविधि में भाग लेते स्कूली छात्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)

AI सहायक है, जगह लेने वाला नहीं

आख़िरी यूनिट का संदेश छात्रों के लिए सबसे ज़रूरी हो सकता है। AI से लिखवाना और AI की मदद से सीखना, दोनों अलग बातें हैं। मॉड्यूल “हेल्पर-स्टांस” अपनाने को कहता है: AI आपके काम को बेहतर बनाए, लेकिन सोचने की ज़िम्मेदारी आपकी रहे।

नोट्स और असाइनमेंट में AI के सही इस्तेमाल पर यही सिद्धांत लागू होता है: पहले खुद समझो, फिर AI से मदद लो, और आख़िर में हर बात की जांच करो।

छोटे छात्रों के लिए भी तैयारी चल रही है

यह मॉड्यूल अकेला नहीं है। इससे पहले 2 अप्रैल को CBSE ने Class 3 से 8 के लिए भी Computational Thinking और AI की पढ़ाई शुरू की थी, जिसमें Class 3 से 5 के लिए साल में 50 घंटे और Class 6 से 8 के लिए साल में 100 घंटे की सिफारिश की गई थी। अब Class 9 से 12 का यह मॉड्यूल जुड़ने से स्कूल स्तर पर AI की पढ़ाई की एक पूरी कड़ी बन गई है।

छात्रों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि AI अब सिर्फ फोन का फीचर नहीं रहेगा, बल्कि कक्षा का विषय भी बनेगा। NCERT की आधिकारिक वेबसाइट पर परिषद के बारे में और जानकारी मिलती है, और AI ख़बरों के और लेख यहां पढ़े जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह मॉड्यूल किन छात्रों के लिए है? यह Class 9 से 12 के छात्रों के लिए बना है और इसके लिए AI की कोई पुरानी जानकारी ज़रूरी नहीं है।

क्या इस मॉड्यूल के लिए कंप्यूटर ज़रूरी है? नहीं। गतिविधियां उपकरणों पर भी हो सकती हैं और कागज़ व कक्षा-चर्चा से भी।

Deepfake पहचानने के लिए मॉड्यूल में क्या सिखाया जाएगा? छात्र गलत जानकारी, Deepfake और AI के भ्रम के बारे में पढ़ेंगे और जानकारी को भरोसा करने या साझा करने से पहले जांचने का पांच चरणों वाला तरीका सीखेंगे।

क्या AI टूल्स को अपनी निजी जानकारी देनी चाहिए? नहीं। मॉड्यूल छात्रों को आधार और पैन नंबर, पासवर्ड, वन-टाइम पासवर्ड और निजी दस्तावेज़ AI टूल्स के साथ साझा न करने की चेतावनी देता है।